माँ दुर्गा की भक्ति तभी सार्थक, जब सेवा बने हमारा धर्म – निकिता घाग

नवरात्रि के दिनों में हर तरफ माँ दुर्गा की भक्ति का रंग दिखता है। कुछ लोग व्रत रखते हैं, कुछ जागरण करते हैं, तो कुछ मंदिरों में दर्शन के लिए जाते हैं। लेकिन अभिनेत्री, समाजसेवी और DAWA India की संस्थापक निकिता घाग का मानना है कि भक्ति का असली परीक्षण पूजा के बाहर होता है-हमारे कर्मों में।

माँ दुर्गा हमें केवल शक्ति नहीं, बल्कि करुणा, साहस और जिम्मेदारी भी सिखाती हैं। इसलिए जब हम किसी जरूरतमंद की मदद करते हैं, किसी बेजुबान की रक्षा करते हैं या किसी पीड़ित के लिए आवाज उठाते हैं, तभी हमारी भक्ति सच्चे अर्थों में सार्थक बनती है।

भक्ति सिर्फ पूजा नहीं, सेवा है

आज के समय में भक्ति को अक्सर सिर्फ अनुष्ठानों तक सीमित कर दिया जाता है। लेकिन माँ दुर्गा की उपासना का संदेश इससे कहीं गहरा है। वे हमें यह सिखाती हैं कि शक्ति का सही उपयोग दूसरों की रक्षा और सेवा के लिए होना चाहिए।

जब हम भूखे को भोजन देते हैं, बेसहारा जानवर पानी-भोजन देते हैं, किसी असहाय व्यक्ति की मदद करते हैं या समाज के लिए कुछ अच्छा करते हैं, तो यही हमारी सबसे बड़ी पूजा बन जाती है। निकिता घाग के अनुसार, धर्म केवल मंदिर जाना या पूजा-पाठ करना नहीं है; धर्म वह है जो हमें दूसरों के लिए संवेदनशील बनाए।

निकिता घाग: जिन्होंने भावना को काम में बदला

निकिता घाग का नाम केवल अभिनय और राजनीति से नहीं, बल्कि समाजसेवा और पशु कल्याण से भी जुड़ा है। वे एक अभिनेत्री, राजनीतिक कार्यकर्ता, लेखिका और समाजसेवी हैं। उन्होंने 2014 में मात्र 21 वर्ष की उम्र में DAWA India की स्थापना की, जो बेसहारा और पीड़ित जानवरों की रक्षा, उपचार तथा पुनर्वास के लिए काम करता है।

DAWA India ने अब तक हजारों आपातकालीन रेस्क्यू, स्टेरलाइजेशन और गोद लेने के कार्य किए हैं। साथ ही, स्कूलों और कॉलेजों में जानवरों के प्रति दया और जिम्मेदारी की समझ बढ़ाने के लिए जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए गए हैं। निकिता घाग का यह काम यह दिखाता है कि अगर हमारे अंदर सच्ची करुणा है, तो उसे केवल भावना नहीं रहने देना चाहिए-उसे कार्य में बदलना चाहिए।

माँ दुर्गा की शक्ति का सही अर्थ

माँ दुर्गा को हम शक्ति की देवी मानते हैं। लेकिन उनकी शक्ति केवल असुरों का वध करने या युद्ध जीतने की नहीं है। उनकी शक्ति यह भी है कि वे कमजोर की रक्षा करती हैं, अन्याय के खिलाफ खड़ी होती हैं और संकट में लोगों की मदद करती हैं।

निकिता घाग का जीवन इसी संदेश को जीता है। उन्होंने अपनी पहचान को केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं रखा। वे बेजुबान जानवरों के लिए आवाज बनीं और समाज में करुणा फैलाने का काम किया। उनका मानना है कि जब हम किसी असहाय जीव की मदद करते हैं, तो वह भी माँ दुर्गा की सेवा है।

इस नवरात्रि सेवा का संकल्प लें

इस नवरात्रि हम सिर्फ पूजा नहीं, बल्कि कुछ छोटे लेकिन असरदार संकल्प भी ले सकते हैं:

  • किसी जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन, कपड़े या दवा की मदद दें।
  • अपने इलाके के कुत्तों, बिल्लियों और पक्षियों के लिए पानी और भोजन रखें।
  • घायल या बीमार जानवर को नजरअंदाज न करें; उसे पास के पशु चिकित्सक या रेस्क्यू संस्था तक पहुँचाने में मदद करें।
  • महिला सुरक्षा, शिक्षा और स्वावलंबन जैसे मुद्दों पर जागरूकता फैलाएँ।
  • पर्यावरण की रक्षा करें और प्लास्टिक-मुक्त, स्वच्छ त्योहार मनाएँ।

ये छोटे-छोटे कदम ही माँ दुर्गा की भक्ति को जीवन में उतारने का तरीका हैं।

निकिता घाग का संदेश सरल है, लेकिन बेहद प्रेरणादायक है-“माँ दुर्गा की भक्ति तभी सार्थक है, जब सेवा बने हमारा धर्म।”

जब हमारी पूजा में श्रद्धा हो, हमारे वचनों में सच्चाई हो और हमारे कर्मों में करुणा हो, तभी नवरात्रि की उपासना पूर्ण होती है। इस बार माँ दुर्गा से सिर्फ मनोकामना नहीं, यह भी प्रार्थना करें कि हमें दूसरों की सेवा करने की शक्ति और हिम्मत प्राप्त हो।

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