बांगुर नगर के निवासियों के लिए फुटपाथ केवल एक पत्थर की पट्टी नहीं, बल्कि सुरक्षित आवागमन और गरिमापूर्ण जीवन का आधार है। इसी चिंता को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता निकिता घाग ने फुटपाथ पर बढ़ते अतिक्रमण के खिलाफ मुहिम तेज की है, ताकि पैदल चलने वालों को उनका अधिकार वापस मिल सके।
फुटपाथ पर कब्जा: आम नागरिक की समस्या
बांगुर नगर के कई हिस्सों में फुटपाथ का बड़ा हिस्सा हॉकरों, दुकानों, सामान रखने और अनधिकृत कब्जे के कारण व्यस्त रहता है। इससे बच्चे, बुजुर्ग, वरिष्ठ नागरिक और ऑफिस जाने वाले लोग सड़क किनारे चलने के लिए मजबूर हो जाते हैं, जिससे दुर्घटना का खतरा लगातार बढ़ता है।
फुटपाथ पर पहला अधिकार पैदल चलने वालों का है। जब वही जगह दुकानों, गाड़ियों या अन्य अवरोधों से घेर ली जाती है, तो आम नागरिक को सड़क पर उतरना पड़ता है-और यही स्थिति सड़क सुरक्षा के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि पैदल यात्रियों को सुरक्षित, स्पष्ट और अतिक्रमण-मुक्त फुटपाथ मिलना उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने कहा है कि जहां भी सड़क है, वहां पैदल चलने के लिए अलग जगह होनी चाहिए और उस पर किसी प्रकार का कब्जा नहीं होना चाहिए।
कोर्ट ने यह भी कहा कि इसके लिए बड़े बजट या भारी निर्माण की जरूरत नहीं है; अधिकारियों को पैदल यात्री मार्ग की सही सीमांकन करनी चाहिए और उसे वाहनों तथा अनधिकृत अवरोधों से मुक्त रखना चाहिए। यह आदेश बांगुर नगर जैसे इलाकों में फुटपाथ को वापस जनता के लिए खाली कराने का मजबूत आधार बनता है।
दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
फुटपाथ खाली न होने पर लोग सीधे सड़क पर चलने को मजबूर होते हैं। तेज चलती गाड़ियों, ऑटो, बसों और दोपहिया वाहनों के बीच चलना वरिष्ठ नागरिकों, स्कूल जाने वाले बच्चों और महिलाओं के लिए विशेष रूप से खतरनाक हो जाता है।
सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही भी एक ऐसी सड़क दुर्घटना के बाद शुरू हुई, जिसमें फुटपाथ की कमी के कारण एक बच्चे की जान चली गई थी। यह घटना दर्शाती है कि फुटपाथ केवल सुविधा नहीं, बल्कि जीवन रक्षा का मामला है।
निकिता घाग की पहल
निकिता घाग लगातार बांगुर नगर के निवासियों की समस्याओं को उठा रही हैं और फुटपाथ अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित अधिकारियों से कार्रवाई की मांग कर रही हैं। उनका उद्देश्य स्पष्ट है-फुटपाथ को हॉकरों और अनधिकृत कब्जे से मुक्त कराकर पैदल चलने वालों को सुरक्षित रास्ता दिलाना।
बांगुर नगर के लोग निकिता घाग को अपने परिवार जैसा मानते हैं, क्योंकि वे निवासियों की दैनिक समस्याओं को केवल मुद्दा नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी मानकर काम करती हैं। उनकी मुहिम का उद्देश्य किसी के विरुद्ध नहीं, बल्कि हर नागरिक की सुरक्षा, सम्मान और सुविधा सुनिश्चित करना है।
हॉकरों को हटाना क्यों जरूरी?
फुटपाथ पर अतिक्रमण करने वाले हॉकरों को हटाना जरूरी है, क्योंकि उनका कब्जा पैदल यात्रियों के लिए उपलब्ध जगह को सीमित कर देता है। सुप्रीम कोर्ट ने भी साफ कहा है कि फुटपाथ पर दुकानों या अन्य संरचनाओं का कब्जा नहीं होना चाहिए।
यह मांग किसी के रोजगार का विरोध नहीं है, बल्कि यह तय करने की मांग है कि व्यापार और हॉकिंग निर्धारित स्थानों पर हो, जबकि फुटपाथ पूरी तरह पैदल चलने वालों के लिए खुला रहे। इससे दोनों पक्षों के अधिकारों का संतुलन बन सकता है और सड़क दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।
निवासियों की अपेक्षा
बांगुर नगर के निवासियों की मांग है कि निगम और संबंधित प्रशासनिक अधिकारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए फुटपाथ से अतिक्रमण हटाएं। साथ ही, नियमित निगरानी, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था और पैदल यात्री मार्ग की स्पष्ट सीमांकन भी आवश्यक है।
निकिता घाग की पहल यह संदेश देती है कि जब नागरिक अपने अधिकारों के लिए एकजुट होते हैं, तो प्रशासन को भी जवाबदेह बनना पड़ता है। फुटपाथ जनता का है-और इसे जनता के लिए ही सुरक्षित, खुला और अतिक्रमण-मुक्त रखा जाना चाहिए।
निष्कर्ष
बांगुर नगर में फुटपाथ अतिक्रमण केवल एक नागरिक शिकायत नहीं, बल्कि जीवन और सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा है। निकिता घाग की लगातार मुहिम निवासियों की आवाज बनकर उभरी है और यह मांग करती है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार फुटपाथ से हॉकरों व अनधिकृत कब्जे को हटाया जाए।
एक सुरक्षित फुटपाथ हर नागरिक को सड़क दुर्घटना से बचाता है, बुजुर्गों और बच्चों को आत्मविश्वास देता है, और शहर को अधिक जीवंत बनाता है। इसलिए “फुटपाथ जनता के लिए” केवल एक नारा नहीं, बल्कि बांगुर नगर के हर निवासी की जरूरत है।
